नवजात शिशु की चोरी पर अस्पताल का लाइसेंस सस्पेंड करें ——-सर्वोच्च न्यायलय
(बाल अभिलेखों के मामलों की प्रतिदिन सुनवाई हो, उच्च न्यायालयों को निर्देश—- बाल अभिलेखों के मामलों की प्रतिदिन सुनवाई हो, छह माह में न्याय निर्णय कर दियाए)
नई दिल्ली :16(अप्रैल),2025, (बुधवार)! सर्वोच्च न्यायलय ने बाल वर्गीकरण और इससे जुड़े अपराध को बेहद गंभीरता से लेते हुए इस पर रोक लगाने के लिए सभी राज्यों को दिशा-निर्देश जारी किए हैं, जिसमें कहा गया है कि अगर किसी महिला अस्पताल में बच्चे का जन्म होता है और उसका बच्चा चोरी हो जाता है, तो सबसे पहले अस्पताल का लाइसेंस जारी करना चाहिए, जिसमें जस्टिस जे बी पारदीवाला और जस्टिस आर महादेवन की पी शामिल हैं।
स्तिथि का पता लगाएं। छह महीने के मामले में राज्य सरकार और भारतीय अनुसंधान एवं विकास संस्थान की रिपोर्ट का अध्ययन करें और उसे जल्द से जल्द लागू करें और उसे जल्द से जल्द किसी भी प्रकार की कोटाही कोर्ट की शेष राशि में शामिल करें, शीर्ष अदालत द्वारा ये टिप्पणी यू.पी. के. अपराध की गंभीर प्रकृति और पितृ पक्ष की झलक देखने को मिली कि उच्च न्यायालय ने अपने विवेक का प्रयोग नहीं किया था, क्योंकि नट नट से कई पुरोहितों का मार्ग प्रशस्त हो गया था, ऐसे देश में भी कहीं भी हो, समाज के लिए उसका बड़ा खतरा है