सर्वोच्च न्यायलय :डांटने का मतलब आत्महत्या के लिए उकसाना नहीं

नई दिल्ली :2(जून ),2025, (सोमवार )! सर्वोच्च न्यायलय ने कहा किसी कों डांटना आत्महत्या के उदेश्य से उकसाना नहीं माना जा सकता है क्योंकि कोई भी समान्य व्यक्ति यह नहीं सोच सकता कि सिर्फ डांटने भर से इतनी बड़ी त्रासदी हों सकती है इस टिप्पणी के साथ ही सर्वोच्च न्यायलय ने हॉस्टल वार्डन कों एक छात्र कों आत्म हत्या के लिए उकसाने के आरोप से बरी कर दिया जस्टिस अहसानुद्दिन अमानुल्ला और जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा की पीठ ने मद्रास हाई कोर्ट के उस आदेश कों ख़ारिज कर दिया, जिसमें भारतीय दंड संहिता की धारा 306के तहत आत्महत्या के लिए उकसाने के अपराध से शिक्षक कों बरी करने से इंकार कर दिया गया था आरोपी एक स्कूल में छात्रावास का प्रभारी था, जिसने एक अन्य छात्र की शिकायत पर दूसरे छात्र कों केवल डांटा था, जिसने बाद मेंअपने कमरे में जा कर फाँसी लगा ली पीठ ने कहा, पूरे मामले पर विचार करने के बाद हम इसे हस्तक्षेप के लिए उपयुक्त मामला पाते है जैसा अपील कर्ता की दलील है, कोई भी यह नहीं सोच सकता कि महज डांटने भर से छात्र ख़ुदकुशी कर लेंगा दूसरे छात्र की शिकायत पर छात्र कों डांटने -फटकारने के पीछे इरादा बस यहीं था कि वह खुद में सुधार करें

दलील ——–फिर गलती न करे, इस उदेश्य से डांटा था

अपीलकर्ता हॉस्टल वार्डन ने सर्वोच्च न्यायलय में ये दलील भी दी कि उसनें तो केवल एक अभिभावक के तौर पर डांटा था, ताकि भविष्य में वह कोई गलती न करें और छात्रावास में शांति और सौहार्द बनाएं रखें वार्डन ने ये भी कहा कि छात्र से उसका कोई व्यक्तिगत संबंध नहीं था, न ही कोई दुश्मनी थी

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