एक भारत श्रेष्ठ भारत, का नारा दे कर सत्ता में आने वाली पार्टी जो उत्तराखंड में भी सत्ता में है क्या उसके केबिनेट मंत्री को एक उत्तराखंड, श्रेष्ठ उत्तराखंड में विश्वास नहीं क्या, ना उत्तराखंड विधानसभा की विधानसभा अध्यक्ष ने रोका ना टोका, जबकि पूरा उत्तराखंड में है जन उबाल, क्या जन भावनाओं को समझेगी सरकार
एक भारत श्रेष्ठ भारत, का नारा दे कर सत्ता में आने वाली पार्टी जो उत्तराखंड में भी सत्ता में है क्या उसके केबिनेट मंत्री को एक उत्तराखंड, श्रेष्ठ उत्तराखंड में विश्वास नहीं क्या, ना उत्तराखंड विधानसभा की विधानसभा अध्यक्ष ने रोका ना टोका, जबकि पूरा उत्तराखंड में है जन उबाल, क्या जन भावनाओं को समझेगी सरकार
केबिनेट मंत्री द्वारा उत्तराखंड के आम जनमानस की भावनाओं को ठेस पंहुचा कर मैदान और पहाड़ के बीच रेखांकित कर दूरियां पैदा की उसका विरोध ना केवल राजनितिक पार्टियां अपितु उत्तराखंड का आम जन मानस भी विरोध में सडको में उतर आया है और दूर भाग्य पूर्ण है की एक भारत, श्रेष्ठ भारत की बात करने वाली पार्टी की सरकार केंद्र में भी है और राज्य में भी है डबल इंजन की सरकार के एक केबिनेट मंत्री प्रेम चंद अग्रवाल ने जिस प्रकार उत्तराखंड की विधानसभा में उत्तराखंड में मैदान और पहाड़ में विभाजन पैदा किया उसकी पुरजोर निंदा हो रही है पहाड़ से मैदान तक विरोध हो रहा है क्या माननीय केबिनेट मंत्री को एक उत्तराखंड, श्रेष्ठ उत्तराखंड रास नहीं आ रहा है, वहीं उत्तराखंड विधानसभा की अध्यक्ष द्वारा ना तो इस मामले में केबिनेट मंत्री को ना रोका, ना टोका और ना ही अभी तक कोहि कार्यवाही की गईं क्या उत्तराखंड की विधानसभा से केबिनेट मंत्री वेतन भत्ते लेने के लिए ही बने है उत्तराखंड के हितों का तिरस्कार आखिर कब तक जारी रहेंगा और कुछ लोग यू ही पहाड़ मैदान को बाँट कर विभाजन की राजनीति को चमकाये गे क्या ऐसे ही चलता रहेंगा एक तरफ राज्य की रजत जयंती की और जा रहा है और हम पहाड़ मैदान से कब बहार निकल एक उत्तराखंड, श्रेष्ठ उत्तराखंड की परिकल्पना को साकार करेंगे और कब राज नेता पहाड़ मैदान को छोड़ उत्तराखंड के विकास को विकसित करेंगे