*हरेला से लेकर हक तक: क्या यही विकसित भारत का विजन है?*
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हरेला की धूम है,
वृक्षारोपण की बह रही बयार है
कुमाऊं की वादियों में फिर से
प्रकृति से मिलने का त्योहार है
बीज बोकर आंगन में,
उगाते हैं उम्मीदों की फसल
धरती मां के माथे पर,
हरी चूड़ियां पहनाने का दिन
हरेला हमें सिखाता है कि भविष्य के लिए आज बीज बोना जरूरी है। पेड़ लगाओ, धरती बचाओ, आने वाली पीढ़ी को हरा-भरा कल दो।
लेकिन सवाल ये है कि जिस पीढ़ी के लिए हम बीज बो रहे हैं, उस “युवा राष्ट्र के भविष्य” के साथ आज कैसा व्यवहार हो रहा है?
*1. सपनों पर डाका: पेपर लीक का कहर*
प्रतियोगी परीक्षाएं आज युवाओं के लिए सपना नहीं, दुःस्वप्न बन गई हैं। NEET, SSC, रेलवे, पुलिस, टीचर भर्ती… हर दूसरी परीक्षा के बाद खबर आती है – “प्रश्न पत्र लीक हो गया”।
गांव का एक लड़का 4 साल तक मेहनत करता है। माँ गहने गिरवी रखती है। और परीक्षा के एक दिन पहले व्हाट्सएप पर पेपर बिक रहा होता है।
मेहनत करने वाला फेल और नकलची पास। ये युवाओं के साथ सबसे बड़ा धोखा है।
*2. आवाज उठाओ तो लाठी का जवाब*
जब युवा थक हार कर सड़कों पर उतरते हैं, अपने हक के लिए आवाज उठाते हैं, तो संवाद की उम्मीद करते हैं। लेकिन जवाब क्या मिलता है? बैरिकेड, वाटर कैनन और लाठीचार्ज।
दिल्ली से पटना, प्रयागराज से देहरादून तक तस्वीरें एक जैसी हैं। हाथ में किताब और तख्ती लिए बच्चे, और सामने पुलिस का डंडा।
क्या संविधान ने हमें यही अधिकार दिए हैं? क्या लोकतंत्र का मतलब यही है कि सवाल पूछने वाले को दबा दो?
*3. तो क्या यही “विकसित भारत” का विजन है?*
सरकारें बड़े-बड़े मंचों से “विकसित भारत 2047” का नारा देती हैं। डिजिटल इंडिया, स्टार्टअप इंडिया की बातें होती हैं। बहुत अच्छी बात है।
लेकिन विकसित भारत का मतलब सिर्फ बुलेट ट्रेन और 5G नहीं होता। विकसित भारत का मतलब ये भी होता है कि एक गरीब का बेटा बिना डर के परीक्षा दे सके। कि उसके आंसू पोंछने के लिए कोई हो। कि उसकी आवाज सुनी जाए, कुचली न जाए।
जब अधिकार मांगने पर दमन किया जाए, तो भला ये कहां तक जायज है?
*4. हरेला का संकल्प और युवा का भविष्य*
हरेला का संदेश है – “संरक्षण और संवर्धन”। प्रकृति का भी, और मानव संसाधन का भी।
आज जरूरत है:
1. *कड़ी कानून*: पेपर लीक माफिया के खिलाफ MCOCA जैसा सख्त कानून।
2. *पारदर्शिता*: हर लीक पर CBI जांच और परीक्षा एजेंसियों की जवाबदेही।
3. *संवाद*: युवाओं की बात सुनी जाए। लाठी आखिरी विकल्प हो, पहला नहीं।
4. *रोजगार*: परीक्षा के बाद समय पर नौकरी मिले।
*निष्कर्ष*
हम हरेला पर पेड़ लगाकर भविष्य सुरक्षित करने की कसम खाते हैं। लेकिन अगर उसी भविष्य यानी युवा को ही हताश कर देंगे, तो हरे-भरे पेड़ों का क्या फायदा?
विकसित भारत का सपना तभी सच होगा जब हमारे युवा सुरक्षित महसूस करेंगे। जब उन्हें लगेगा कि मेहनत का फल मिलेगा, और आवाज उठाने पर लाठी नहीं, समाधान मिलेगा।
आओ हरेला के इस पावन पर्व पर हम सिर्फ पेड़ ही न लगाएं, एक ऐसा सिस्टम भी लगाएं जहां युवा का भविष्य सुरक्षित हो। एक भी प्रतियोगी परीक्षा में प्रश्न पत्र लीक होना न केवल युवाओं का अपितु उनके मां बाप के सपनों के साथ युवाओं की मेहनत पर पानी डाल देता है क्या स्वतंत्र भारत में आज युवा अपने अधिकारों को नहीं मांग सकता है क्या और क्या इसका संवाद द्वारा हल नहीं निकाला जा सकता था आखिर अपने अधिकारों और सुरक्षित भविष्य के लिए चिंतित युवाओं पर आखिर लाठीचार्ज क्यों? क्या इसका सार्थक समाधान नहीं निकाला जा सकता था
*— कुलदीप सिंह*
*संपादक, अटल लक्ष्य न्यूज पोर्टल*
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