सरकारों द्वारा जनहित की उपेक्षा करके चन्द लोगों के स्वार्थों के कारण समय समय पर कोई न कोई विवाद का विषय खड़ा कर दिया जाता है। स्मार्ट सिटी तो बन नही सकी स्मार्ट मीटर ले आए। यह प्रीपेड हों या पोस्टपेड, स्वयं चार्ज करना 50% उपभोक्ताओं के भी बस की बात नही जिसके लिए फिर वह किसी के माध्यम से करायेगा और उसको अतिरिक्त शुल्क देना होगा।जिन लोगों के निवासों पर पहले इस तरह के मीटर लगाने की बात कही जा रही वह सब तो मुफ्त खोरों की श्रेणी मे आते हैं।जनहित मे फिलहाल यही अच्छा रहेगा कि यह मीटर लगबाना वैकल्पिक रहे उपभोक्ता अपनी इच्छानुसार लगवाएं।
यश वीर आर्य
संयोजक
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