शीर्षक: “पहाड़ के प्रहरी से संसद के संतरी तक – मेजर जनरल भुवन चंद खंडूरी को नमन”

 

 

*मेजर जनरल भुवन चंद खंडूरी जी को भावभीनी श्रद्धांजलि*

*”अटल लक्ष्य न्यूज पोर्टल” पर प्रकाशन हेतु आलेख*

*आलेख संपादक: कुलदीप सिंह*

 

 

*शीर्षक: “पहाड़ के प्रहरी से संसद के संतरी तक – मेजर जनरल भुवन चंद खंडूरी को नमन”*

 

*उत्तराखंड का एक सूरज आज अस्त हो गया।* भारत माता के वीर सपूत, देवभूमि के निर्माता, ईमानदारी की मिसाल और विकास के पर्याय *मेजर जनरल भुवन चंद खंडूरी जी* अब हमारे बीच नहीं रहे। “अटल लक्ष्य” परिवार एवं संपादक कुलदीप सिंह की ओर से उस महान आत्मा को कोटि-कोटि नमन, अश्रुपूरित श्रद्धांजलि।

 

*1

गढ़वाल की मिट्टी में जन्मे खंडूरी जी ने भारतीय सेना में मेजर जनरल के पद तक देश की सेवा की। 1965 और 1971 के युद्ध में दुश्मन को धूल चटाई। सेना से सेवानिवृत्त होकर जब राजनीति में आए, तो वही फौजी अनुशासन, वही कर्तव्यनिष्ठा और वही “Nation First” का जज्बा लेकर आए। उनके लिए राजनीति सेवा थी, पेशा नहीं।

 

*2. सड़क मंत्री के रूप में – भारत को जोड़ने वाले “रोड किंग”*

भारत सरकार में सड़क, परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री के रूप में उन्होंने जो क्रांति की, उसे देश कभी नहीं भूलेगा। *”स्वर्णिम चतुर्भुज परियोजना”* और *”प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना”* को जमीन पर उतारने का श्रेय उन्हीं को जाता है। अटल जी के सपने को भुवन जी ने सड़कों के जाल में पिरोया। आज गांव-गांव तक जो पक्की सड़क पहुंची है, उस हर ईंट पर खंडूरी जी का नाम लिखा है। उन्होंने कहा था – _”सड़कें सिर्फ जमीन नहीं जोड़तीं, दिल भी जोड़ती हैं, विकास भी जोड़ती हैं।”_

 

*3. उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के रूप में – “ईमानदार सीएम” की पहचान*

2007 में जब वे उत्तराखंड के मुख्यमंत्री बने, तो उन्होंने सबसे पहला काम किया – *भ्रष्टाचार पर सर्जिकल स्ट्राइक*। “सिटिजन चार्टर” लागू कर सरकारी दफ्तरों में समय-सीमा तय की। “ट्रांसफर-पोस्टिंग उद्योग” को बंद किया। अफसरों से कहा – _”या तो काम करो, या कुर्सी छोड़ो।”_ पहाड़ की पीड़ा को उन्होंने समझा। पलायन, पानी, स्वास्थ्य – हर मुद्दे पर फौजी अंदाज में काम किया। जनता ने उन्हें प्यार से *”खंडूरी क्रांति”* का नाम दिया।

 

*4. एक निष्कलंक जीवन – सादगी की प्रतिमूर्ति*

खंडूरी जी का जीवन आज के नेताओं के लिए पाठशाला है। 5 बार सांसद, केंद्रीय मंत्री, मुख्यमंत्री – इतने पदों पर रहने के बावजूद देहरादून में एक साधारण से घर में रहे। कभी परिवारवाद नहीं किया। कभी दाग नहीं लगने दिया। विरोधी भी उनके चरित्र पर उंगली नहीं उठा सके। यही कारण था कि जनता उन्हें *”उत्तराखंड का गांधी”* कहती थी।

 

*5. देवभूमि का सच्चा सपूत – पहाड़ से उनका अटूट नाता*

पौड़ी गढ़वाल से उनका रिश्ता खून का था। हर गांव, हर पट्टी, हर दुख-सुख से वाकिफ थे। मुख्यमंत्री रहते हुए भी आम आदमी की तरह लोगों से मिलते थे। बुजुर्ग का हाथ पकड़कर हाल पूछते थे, युवा को रोजगार के लिए प्रेरित करते थे। उन्होंने साबित किया कि *”नेता वो नहीं जो AC में बैठे, नेता वो है जो जनता के बीच पसीना बहाए।”*

 

*आज उत्तराखंड अनाथ हो गया।* एक ऐसा नेता चला गया जिसने कभी झूठ नहीं बोला, कभी वादा नहीं तोड़ा, कभी पहाड़ के स्वाभिमान से समझौता नहीं किया। उनकी कमी कोई पूरी नहीं कर सकता। और उन्होंने सदैव राष्ट्र व समाज की सेवा का संकल्प लिया और कही महत्वपूर्ण कार्य किए और उत्तराखंड में सशक्त लोकायुक्त की मांग भी उठाते रहे।

 

*”अटल लक्ष्य” का संपादक होने के नाते मैं, कुलदीप सिंह, यह संकल्प लेता हूं* कि खंडूरी जी के “ईमानदारी, अनुशासन और विकास” के मार्ग पर चलकर पत्रकारिता करूंगा। उनकी तरह कलम को कभी बिकने नहीं दूंगा। सच की रणभेरी बजाता रहूंगा।

 

*हे देवभूमि के लाल, आपकी कमी हमेशा खलेगी।*

*आपका जीवन आने वाली पीढ़ियों को रास्ता दिखाता रहेगा।*

*सड़कें आपकी कहानी कहेंगी, पहाड़ आपकी गाथा गाएंगे।*

 

*मेजर जनरल भुवन चंद खंडूरी अमर रहें।*

*ॐ शांति शांति।* 🙏🪔

 

*विनम्र श्रद्धांजलि सहित*

*कुलदीप सिंह*

*आलेख संपादक, अटल लक्ष्य न्यूज पोर्टल*

*सेक्टर वार्डन गृह विभाग उत्तराखंड*

M/8755849325

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

*चढ़दी कला। देश ने एक रत्न खोया है। हम सबकी आंखें नम हैं।*

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