*अटल लक्ष्य न्यूज़ | विशेष कविता*
*अवसर: अंतर्राष्ट्रीय नर्स दिवस – 12 मई*
*शीर्षक: “सफेद परी की सौगंध”*
*कलम: कुलदीप सिंह ‘सरदार’ | संपादक, अटल लक्ष्य | सेक्टर वार्डन, सिविल डिफेंस*
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*न नींद अपनी, न दिन अपना, न रात अपनी होती है,*
*जिसने मरीज की मुस्कान को दुआ समझ लिया,*
*वो ही तो नर्स कहलाती है।*
*इंजेक्शन में सिर्फ दवा नहीं भरती वो,*
*हौसला भरती है, जिंदगी भरती है,*
*जब डॉक्टर भगवान बनता है,*
*तब नर्स फरिश्ता बनकर खड़ी होती है।*
*DNC वार्ड की वो रात याद है मुझे,*
*जब दर्द से आंख खुली तो,*
*सफेद कोट में ममता बैठी मिली।*
*बोली – “सरदार जी, घबराओ मत,*
*हम हैं ना… वाहेगुरु सब ठीक करेगा।”*
*ना त्योहार देखती, ना छुट्टी मांगती,*
*अपने बच्चों को छोड़कर,*
*दूसरों के बच्चों को जिंदगी देती है।*
*कोविड में PPE किट पहनकर,*
*मौत को मात देती है।*
*सिविल डिफेंस का वार्डन हूं मैं,*
*आपदा में ड्यूटी समझता हूं,*
*पर नर्स? वो तो हर दिन आपदा से लड़ती है।*
*बिना हथियार, बिना वर्दी के तमगे,*
*सिर्फ सेवा की सौगंध खाकर।*
*हे नाइटिंगेल की वारिस,*
*तेरी सफेद साड़ी तिरंगे से कम नहीं,*
*तेरा थर्मामीटर तलवार से कम नहीं,*
*तेरी हंसी ऑक्सीजन से कम नहीं।*
*आज नर्स दिवस है,*
*अटल लक्ष्य की कलम झुककर सलाम करती है।*
*उन हाथों को, जो मरते हुए को जिंदा कर देते हैं।*
*उन आंखों को, जो रातभर जागकर नींद हराम कर देती हैं।*
*उन पैरों को, जो 12 घंटे वार्ड में दौड़कर भी थकते नहीं।*
*सुनो देशवासियो,*
*अस्पताल में डॉक्टर इलाज करता है,*
*पर नर्स जिंदगी देती है।*
*इंजेक्शन वो लगाती है,*
*पर दर्द वो हर लेती है।*
*तो आज वादा करो,*
*कभी नर्स पर हाथ न उठेगा,*
*कभी गाली न देंगे,*
*कभी “सिस्टर” को नौकर न समझेंगे।*
*क्योंकि जिस दिन नर्स रुक गई,*
*उस दिन जिंदगी की सांस रुक जाएगी।*
सेवा ही धर्म है कि मर्म को जो समझें, हर दर्द को जो अपना समझें, बिना भेद भाव सेवा करें, उसके सेवा भाव, समर्पण को कोटि कोटि प्रणाम हैं
*विकसित भारत 2047 का सपना,*
*स्वस्थ भारत के बिना अधूरा है।*
*और स्वस्थ भारत की पहली गारंटी –*
*एक मुस्कुराती हुई नर्स है।*
*जय हिंद। जय नर्स। जय सेवा* 🚩🙏
*– कुलदीप सिंह ‘सरदार’*
*संपादक, अटल लक्ष्य न्यूज़*
*सेक्टर वार्डन, सिविल डिफेंस*
देहरादून, उत्तराखंड
M/8755849325