*संपादकीय आलेख –
*विकसित भारत विजन 2047: संकल्प, समर्पण, सेवा – यही राष्ट्रधर्म है*
*संपादक: कुलदीप सिंह | अटल लक्ष्य न्यूज पोर्टल*
*10मई 2026*, रविवार,
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*हुंकार भर रहा है भारत – 2047 की ओर अटल कदम*
*सुनो! समय की छाती पर इतिहास लिखा जा रहा है।*
*1947 में हमने जंजीरें तोड़ी थीं, 2047 में हमें दुनिया की धुरी बनना है।*
लाल किले की प्राचीर से गूंजा ‘विकसित भारत’ का मंत्र अब शंखनाद बन चुका है। ये योजना नहीं, *युग-परिवर्तन का संकल्प है।* संकल्प, समर्पण, सेवा – इन तीन अक्षरों से ही भारत का भाग्य लिखा जाएगा।
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*1. संकल्प: मिट्टी से मिसाइल तक, गरीबी से गैलेक्सी तक*
*संकल्प क्या है?*
*2047 में जब तिरंगा शताब्दी मनाए, तब भारत 30 ट्रिलियन डॉलर का शिखर हो।* प्रति भारतीय की आय $25,000 हो। कोई भूखा न सोए, कोई बेघर न रहे, कोई निरक्षर न हो।
*क्यों असंभव नहीं?*
*कल तक हम 99% मोबाइल खरीदते थे, आज 99% बनाते हैं।* UPI से दुनिया लेन-देन सीख रही। चंद्रयान ने चांद पर तिरंगा गाड़ा। सेमीकंडक्टर से लेकर स्पेस तक, ग्रीन हाइड्रोजन से लेकर AI तक – भारत अब ‘फॉलोअर’ नहीं, *‘फोर्स’* है।
*याद रख:* विकसित भारत का अर्थ पेट्रोल पंप पर लंबी लाइन नहीं, *हर घर में सोलर, हर खेत में ड्रोन, हर युवा के हाथ में स्टार्टअप* है। ये संकल्प अटल है।
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*2. समर्पण: 140 करोड़ भुजाएं, एक लक्ष्य*
*सरकारें आती-जाती हैं, राष्ट्र अमर रहता है।* विकसित भारत किसी PM, किसी पार्टी का सपना नहीं – *ये मेरा-तेरा-सबका सपना है।*
*कौन करेगा समर्पण?*
*1. युवा:* दुनिया का 21% युवा 2047 में भारतीय होगा। कोड लिखने वाला भी सैनिक है, खेत में हल चलाने वाला भी वैज्ञानिक है।
*2. नारी शक्ति:* ड्रोन दीदी से राफेल उड़ाने तक – आधी आबादी पूरी ताकत से लड़ेगी तो कौन रोक पाएगा?
*3. किसान-जवान-विज्ञान:* MSP नहीं, ‘मार्केट लीडरशिप’ चाहिए। सीमा पर जवान, लैब में वैज्ञानिक, फैक्ट्री में कारीगर – सबका खून-पसीना ही ‘विकसित’ की स्याही है।
*सुन लो:* कुर्सी पर बैठकर भाषण देने से राष्ट्र नहीं बनते। *पसीना बहाना पड़ेगा, आराम हराम करना पड़ेगा।* यही समर्पण है।
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*3. सेवा: अंतिम व्यक्ति की आंख का आंसू ही विकास का पैमाना*
*विकास क्या है?*
*देहरादून को ‘स्मार्ट सिटी’ कहो और वार्ड-17 में 3 दिन सीवर बहता रहे – ये विकास नहीं, धोखा है।*
*असली विकास:* जब दून महिला हॉस्पिटल में ₹10 में बेटी जन्मे, जब आदिवासी के घर नल से जल आए, जब बुजुर्ग को लाइन में न लगना पड़े।
*सेवा का मतलब:* DM का दरवाजा 2 बजे रात भी खुले। ठेकेदार सड़क बनाए तो 20 साल टूटे नहीं। डॉक्टर मरीज को ‘ग्राहक’ नहीं ‘परिवार’ समझे। *भ्रष्टाचार की एक ईंट भी 2047 की नींव को खोखला कर देगी।*
*चेतावनी:* 8 प्रोजेक्ट 38 महीने लेट, ₹10 करोड़ लागत बढ़ी – ये ‘सेवा’ नहीं ‘मेवा’ खाने वाले गिद्ध हैं। इन्हें पहचानो।
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*अग्निपथ: चुनौतियां भी कम नहीं*
*1. बाबूगिरी:* एक विभाग पाइप डालता है, दूसरा तोड़ देता है। ये ‘स्मार्ट’ नहीं ‘समन्वयहीन’ भारत है।
*2. प्रतिभा पलायन:* IIT का टॉपर सिलिकॉन वैली जाए – तो विकसित भारत कौन बनाएगा?
*3. पर्यावरण:* फैक्ट्री चाहिए, पर गंगा मैली नहीं चाहिए। विकास हो, पर विनाश की कीमत पर नहीं।
*पर याद रखना:* चुनौतियां चट्टान हैं, संकल्प हथौड़ा है। *चट्टान टूटेगी, हथौड़ा नहीं।*
वहीं राष्ट्र व समाज के प्रति सेवा, समर्पण, संकल्प की भावना ही राष्ट्र की उन्नति की मजबूत आधार शिला रखेगी और एक भारत श्रेष्ठ भारत की भावना से ही हम सब आपसी मतभेद, मनभेद, मिटा कर विकसित भारत के संकल्प को पूर्ण कर सकते हैं । राजनीतिक विरोध को दरकिनार कर सबको विकसित भारत विजन 2047 के लिए समर्पित भाव से कार्य करना होगा, न केवल इसमें सरकार अपितु आम जनता भी सहभागी होंगी तभी लक्ष्य विकसित भारत का मजबूत होगा।
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*अटल लक्ष्य की हुंकार*
*‘अटल लक्ष्य’ का संपादक पूछता है – तू तैयार है?*
*1. संकल्प ले:* आज से घूस नहीं दूंगा, गंदगी नहीं करूंगा, देश को गाली नहीं दूंगा।
*2. समर्पण कर:* 1 घंटा रोज देश के लिए – पढ़ा, पढ़ाया, पेड़ लगाया, पेटेंट कराया।
*3. सेवा कर:* वर्दी हो या कुर्ता – याद रख तनख्वाह जनता की है। ‘साहब’ नहीं ‘सेवक’ बन।
*1947 में हमने ‘अंग्रेजो भारत छोड़ो’ कहा था।*
*2026 में कहो – ‘गरीबी भारत छोड़ो, गुलामी भारत छोड़ो, गंदगी भारत छोड़ो’।*
*2047 का सूरज जब उगेगा, तो दुनिया देखेगी –*
*न सड़क पर सीवर बहेगा, न आंख में आंसू रहेगा।*
*हर घर तिरंगा होगा, हर मन में भारत होगा।*
*उठो, जागो, दौड़ो – 2047 दस्तक दे रहा है।*
*संकल्प अटल है, समर्पण प्रचंड है, सेवा परम धर्म है।*
*यही है विकसित भारत – वंदे मातरम्!* 🇮🇳
*– कुलदीप सिंह*
*संपादक, अटल लक्ष्य*
न्यूज पोर्टल।