शीर्षक — राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ,:100 वर्ष की तपस्या, राष्ट्र निर्माण का अमृत -काल

 

 

 

 

 

 

 

 

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*विजयादशमी 1925, नागपुर की एक छोटी सी शाखा – और विजयादशमी 2025, विश्व का सबसे बड़ा स्वयंसेवी संगठन।*

*ये 100 साल सिर्फ संगठन का नहीं, भारत के स्वत्व जागरण की तपस्या है।*

 

*1. तपस्या का प्रथम संकल्प: “व्यक्ति निर्माण से राष्ट्र निर्माण”*

*डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार जी ने कहा था – “हिंदुस्तान हिंदू राष्ट्र है”।*

*100 साल में संघ ने करोड़ों स्वयंसेवकों को “मैं नहीं, हम” का मंत्र दिया।*

*परिणाम:*

*आज सरहद पर सेना, आपदा में सिविल डिफेंस, बाढ़ में NDRF के साथ खाकी निकर वाला स्वयंसेवक सबसे पहले खड़ा मिलता है।*

*ये तपस्या है – बिना वेतन, बिना नाम, केवल राष्ट्र के नाम।*

 

*2. तपस्या का द्वितीय चरण: “सेवा ही संगठन”*

*1962 युद्ध हो या 2020 कोरोना – संघ के सेवा भारती ने सिद्ध किया कि राष्ट्र पर संकट = स्वयंसेवक का कर्तव्य।*

*उत्तराखंड में 2013 केदारनाथ आपदा भूल सकते हैं क्या?*

*जब सरकारी तंत्र पहुंचा, उससे पहले संघ का स्वयंसेवक लंगर लेकर पहुंच गया था।*

*सिविल डिफेंस के वार्डन के रूप में मैं साक्षी हूं – RSS की प्रेरणा से ही “आपदा मित्र” बनने का भाव आता है।*

 

*3. तपस्या का तृतीय संकल्प: “एक भारत, श्रेष्ठ भारत”*

*कश्मीर से कन्याकुमारी, कच्छ से कोहिमा – संघ की शाखा भारत को जोड़ने का सूत्र है।*

*अनुच्छेद 370 हटना, राम मंदिर निर्माण, नई शिक्षा नीति – ये 100 साल की तपस्या के फल हैं।*

*प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी, गृहमंत्री अमित शाह जी से लेकर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी जी तक – संघ की शाखा से निकले दीपक आज भारत का भाग्य आलोकित कर रहे हैं।*

 

*4. तपस्या का अमृत: “विकसित भारत @2047″*

*2025 में 100 वर्ष पूरे कर संघ अब अगले 25 साल के “अमृत-काल” में प्रवेश कर रहा है।*

*लक्ष्य स्पष्ट है: 2047 तक भारत को परम वैभव पर पहुंचाना।*

*कैसे?*

– *पर्यावरण:* एक पेड़ मां के नाम – हर स्वयंसेवक 100 वृक्ष

– *कुटुंब प्रबोधन:* टूटी परिवार व्यवस्था को जोड़ना

– *स्वदेशी:* लोकल फॉर वोकल – हर जिला, एक उत्पाद

– *नागरिक कर्तव्य:* अधिकार नहीं, कर्तव्य पहले

 

*ये वही “पंच प्रण” हैं जो प्रधानमंत्री जी ने लाल किले से दोहराए। क्योंकि संघ और सरकार का DNA एक है – भारत माता।*

 

*5. देहरादून से संकल्प: हम क्या करें?*

*राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने 100 साल दिए, अब हमारी बारी है।*

*अटल लक्ष्य न्यूज पोर्टल के माध्यम से मेरा संकल्प:*

1. *हर शाखा की खबर, हर स्वयंसेवक की गाथा – जनता तक पहुंचेगी।*

2. *सिविल डिफेंस और संघ के सेवा कार्यों को जोड़कर देहरादून को “आपदा-रोधी मॉडल” बनाएंगे।*

3. *2025 से 2047 तक – हर दिन एक खबर “विकसित भारत” के नाम।*

 

*क्योंकि संघ ने सिखाया है – “नमस्ते सदा वत्सले मातृभूमे” – केवल प्रार्थना नहीं, प्रतिज्ञा है।*

 

 

*उपसंहार: 100 साल की तपस्या का प्रसाद*

*100 साल में संघ ने सत्ता नहीं मांगी, समाज गढ़ा।*

*समाज गढ़ा तो सत्ता खुद आ गई।*

*आज भारत का तिरंगा G-20 से लेकर चंद्रयान तक लहरा रहा है – इसके पीछे संघ के 100 साल की शाखा-तपस्या है।*

 

*आइए, विजयादशमी 2025 पर संकल्प लें:*

*हम भी तन-मन-धन से भारत माता के चरणों में 25 साल देंगे।*

*ताकि जब संघ 125 वर्ष का हो, भारत विश्वगुरु के सिंहासन पर हो।*

 

*भारत माता की जय।*

*वंदे मातरम्।*

*साधुवाद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को – 100 साल की तपस्या के लिए।*

 

*– कुलदीप सिंह*

*वार्डन, सिविल डिफेंस देहरादून*

*संपादक, अटल लक्ष्य न्यूज पोर्टल*

*”विकसित भारत @2047 के लिए प्रतिबद्ध”*

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

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