नई दिल्ली,30/1/2025, वीरवार, सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार से तीन तलाक कानून या मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार सरक्षण )अधिनियम,2019के लागू होने के बावजूद से मुस्लिम पुरषों के खिलाफ दर्ज एफ आर आई और दाखिल आरोप पत्र का ब्यौरा माँगा है मामले कि सुनवाई के दौरान मुख्य नयायधीश जस्टिस संजीव खन्ना ने कहाँ कि उन्हें यकीन है कि कोर्ट में मौजूद कोई वकील यह नहीं कह रहा है कि तीन तलाक कि प्रथा सही है, लेकिन वें कह रहें है कि क्या इसे अपराध माना जा सकता है, जबकि इस प्रथा पर प्रतिबंध है एक साथ तीन बार तलाक बोलकर शादी का रिश्ता ख़त्म नहीं हो सकता है जस्टिस संजीव खन्ना व जस्टिस पी वीं संजय कुमार कि पीठ 2019के कानून, विशेष रूप से तीन तलाक कि प्रथा को अपराध बनाने वाले प्रावधानों को चुनौती वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी पीठ ने तीन तलाक के लंबित मामलों व कानून के खिलाफ हाई कॉर्ट में लंबित याचिकाओं के बारे में भी पूछा पीठ ने दोनों पक्षो से लिखित दलीलें देने को कहाँ है कॉर्ट ने कहाँ याचिकाकर्ता इस प्रथा के आपराधिकरण को चुनौती दें रहें है खुद प्रथा का बचाव नहीं कर रहें है
