
देहरादून,21/1/2025मंगलवार, उत्तराखंड में शिक्षा का रोल मॉडल कुछ प्रभारी प्रधानाचार्य जिनके हाथों में पुस्तकों के स्थान पर मदिरा व गिलास सोभाएमान है शिक्षक समाज का दर्पण कहलता है और भारतीय जीवन पद्द्ति में गुरु का दर्जा माँ बाप से भी ऊंचा स्थान मिला है, परन्तु उत्तराखंड में जहाँ नवीन शिक्षा पद्द्ति द्वारा बच्चों को शिक्षित करने कि बात कर उन्हें शिक्षा में पारंगत करने कि बात चल रही है वहीँ इस शिक्षा के मॉडल को आपनो से ही खतरा हो गया है जिस शिक्षक का कार्य समाज में जागृति व चिंतन लाना था आज वहीँ नशे मदिरा पान कर हाथों में पुस्तक के स्थान पर कुछ प्रभारी प्रधानाचार्य देहरादून के हाथों में पुस्तक के स्थान पर गिलास और मदिरा की बोतल पकड़े समाज को और विशेष कर बच्चों में क्या असर डालेंगे जंगल में मंगल कर कानून को तोड़ने विशेष कर वन कानून का उलघन कर वन्य जीव जंतुओं को खतरे में डाल कर वना अग्नि का खतरा उत्पन्न करना और बहुमूल्य पेड़, पौधे और अमूल्य जड़ी बूटी नष्ट हो सकती थी वहीँ ऑपरेशन मर्यादा का भी उलघन है, पर आखिर कब जिम्मेदार विभाग जागेंगे चाहें शिक्षा विभाग हो, पुलिस विभाग या वन्य विभाग कब इस बात का सज्ञान लें कार्यवाही कर राष्ट्र का भविष्य को जागरूक करने के स्थान पर गलत सन्देश देने वाले इन शिक्षको पर कब कार्यवाही होंगीं या ये पुरोधा शिक्षा के पुरोधा है या मदिरा पान के क्या ये उत्तराखंड की शिक्षा के रोल मॉडल है