धन्यवाद सभी रंगकर्मियों को, बहुत-बहुत मुबारकबाद इस सफल प्रस्तुति के लिए।Playwright Ravindra Tripathy’s review on AURANGZEB
6(जुलाई )एलटीजी गैलरी में देहरादून के रंगकर्मी अखिलेश नारायण के निर्देशन में `औरंगजेब’ नाटक देखा। ये इंदिरा पार्थसारथी का अंग्रेजी नाटक है जिसका हिंदी-हिंदुस्तानी अनुवाद मेरे मित्र शाहिद अनवर ने किया है। शाहिद अब इस दुुनिया में नहीं है इसलिए इस नाटक को देखते हुए उनकी याद भी आई।
अखिलेश ने इस नाटक को कल्पनाशीलता के साथ पेश किया है। ये उस दौर का भी नाटक है जिसमें औंरंगजेब और दाराशिकोह जीवित थे और ये आज का भी नाटक है। समकालीन राजनीति के कई पहलू भी यहां हैं। इसमें औरंगजेब के आखिरी वक्त को भी दिखाया गया है जो बेशक काल्पनिक है लेकिन कई अहम मु्ददों को समेंटता है जैसे ये कि समाज के सत्तावान लोग जो अपने समय में हिंसा फैलाते हैं वे किस तरह जीवन के अंत में मानसिक उलझनों में रहते हैं। दूसरे शब्दों में कहें तो ये आत्मबोध का भी नाटक है।
अखिलेश के पास अच्छे अभिनेताओं की एक टीम है। सभी कलाकारों ने अच्छा काम किया है। न्यूनतम सेट में भी नाटक का प्रभाव महत्तम है।
