जिला अधिकारी देहरादून से देहरादून में हो रही अव्यवस्थाओ को लेकर जागरूक बनों, आवाज उठाओं, संगठन सयोजक —_-यश वीर आर्य ने उठाए सवाल, वहीं उन्होंने जिला अधिकारी देहरादून से जन हित में सज्ञान लेने की कि अपील

मैं आपका ध्यान देहरादून की कुछ अव्यवस्थाओं की ओर आकर्षित करना चाहता हूं :-

1. देहरादून के राजपुर मार्ग पर बिजली के तारों को भूमिगत करने का कार्य लगभग हो चुका है लेकिन अनेक स्थानों पर सड़क के एक ओर से दूसरी ओर तार फैलते जा रहे है।

2. घंटाघर से राजपुर तक तरह तरह Road dividers बने हैं वह भी untidy.बस घास कटाई।

3. तहसील चौक से महाराजा अग्रसेन चौक से Road dividers खंभे लगे और brakets भी लेकिन किसी तरह की लाइट्स नही,खंभों का प्रयोग/दुरूपयोग, अधिकृत/अनधिकृत बैनर्स के लिए हो रहा।

4. अग्रसेन चौक से सहारनपुर चौक तक रेलवे स्टेशन सहित Road dividers की दुर्दशा जो आने वाले यात्रियों को देहरादून स्मार्ट सिटी के दर्शन कराती है.

5. किसी भी सड़क क्या मुख्य सड़क का 10 मीटर का भाग भी ककड़ पत्थर,धूल मिट्टी और कूड़ा करकट मुक्त नही ।

6. शायद तोड़ो बनाओ तोड़ो की नीति के अंतर्गत घंटाघर के चारों तरफ फिर तोड़ने की कार्यवाही शुरू हो चुकी है।

7. एक तरफ तो हर वर्ष अनगिनत पौधे रोपित किए जाते रहे हैं वहीं गांधी पार्क के सामने ही सूखे पैडों के ठूठ खड़े हैं,एक स्थान पर मैने स्वयं पौधा लगाया लेकिन वह बच नही सका ।

8.सरकार द्वारा दुकानों, प्रतिष्ठानों क्या व्यक्तिगत स्थानों पर एक के स्थान पर चार चार बोर्ड्स लगाए गए थे उनमे से पलटन बाजार को छोड़कर लगभग 50% धराशाही हो गए ऊपर का नाम तो बहुत पहले ही गिर चुका था। खाली दुकानों पर भी बोर्ड्स लगा दिए थे उनपर कोई भी नंबर लिख दिया था। हुई

9. दिलाराम से राजपुर की ओर दसियों लाइट्स के खंभे धराशाही कर दिए गए शायद विज्ञापनों के लिए खंभे लगाने की भूमिका बांधी जा रही।

10.यह बिल बोर्ड्स वाहन चालकों का ध्यान बांटते है जो दुर्घटना के कारण हो सकते हैं।

11.लगभग सभी बड़े बड़े मार्ग सूचक/स्थान सूचक बोर्ड्स के नीचे आए दिन बैनर्स लग जाते है जो बिना किसी विभाग की मिली भगत से संभव नहीं क्योंकि सब hydraulic ladder से रात के अंधेरे मे लगते है। जब वह बैनर्स फट जाते हैं तो उनके चीथड़े लटकते रहते हैं।

12.कैनाल रोड, जखन के 3 km ,के भाग में सड़क के दोनों ओर 4 मीटर तक के, सड़क के लेवल से 60 सेंटीमीटर तक ऊंचाई के रैंप बने है,कही कोई लेवल कहीं और।

कम से कम लगभग 20 टैक्सियां खड़ी रहती है उनके मालिक /चालक शायद आस पास रहते है उन्होंने इन वाहनों को अपने परिसर मे रखने की कोई व्यवस्था नही कर रखी है। जबकि आगे पुलिस अधिकारी कॉलोनी होने के कारण दसियों पुलिस अधिकारी और राजनैतिक लोग इधर से निकलते हैं। पैदल चलना मुश्किल।

13. गली मौहल्लों का बिजली का कोई खंबा ऐसा नही जिसपर तारों का मक्कड़ जाल न हो,आजकल पक्षी उनपर घोंसला बनाते हैं जो चिंगारी निकलने पर आग दुर्घटना का कारण।

14.देहरादून मे बस एक ही कार्य स्मार्ट सिटी का है वह कुछ स्थानों पर ही स्मार्ट जनसुविधा इसके अतिरिक्त कुछ नही।

15. कैनाल रोड पर ही बस्ती मे ही एक किलोमीटर के radius मे ही गैस गोदाम और पेट्रोल पम्प (जब यह बन रहा था तब ही उस समय के जिलाधिकारी को पत्र दिया था)

15. साकेत कॉलोनी के सामने शायद फ्लैट्स निर्माण के लिए जमीन की नीचे की ओर खुदाई चल रही,क्या इसकी गहराई की कोई सीमा नही।

16.कैनाल रोड का लगभग 4 km का भाग व्यावसायिक हो गया है क्या वहां से व्यावसायिक दरों से भवन कर लिया जा रहा।

17.इतने व्यावसायिककरण के बाबजूद भी कोई जन सुविधा स्थान नही

18.NIVH के पिछले गेट के समीप मन्दिर की आड मे नाले के ऊपर अतिक्रमण बढ़ता ही जा रहा।

यह सब अव्यवस्थाएं तो केवल लगभग 10 km के भाग की ही हैं जहां मेरा जाना होता है।पूरे देहरादून का क्या हाल होगा ?

  यदि नगर निगम,लोक निर्माण विभाग,प्राधिकरण, स्मार्ट सिटी, जलसंस्थान,बिजली विभाग और दूर संचार विभाग वास्तव में शहर के अच्छी व्यवस्था के प्रति गंभीर हैं तो आपस में समन्वय करके कम से कम दो वर्षों की कार्य योजना बनाकर कार्य करें तो करोड़ों रूपये की बचत होगी और देहरादून वास्तव मे स्मार्ट दिखेगा

विश्वास है आप मेरे द्वारा उजागर अव्यवस्थाओं के समाधान के लिए संबंधित विभागों को आदेश प्रदान करते हुए देहरादून को स्मार्ट बनायेंगे।

शुभकामनाओं सहित

यश वीर आर्य

संयोजक

जागरूक बनो आवाज उठाओ

9719111920

21 अप्रैल 2025

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