नई दिल्ली :15(मई ),2025, (वीरवार )! सेना की जज एडवोकेट जनरल (कानूनी ) शाखा में महिलाओं की कम संख्या (गिनती ) पर सर्वोच्च न्यायलय ने हैरानी जाहिर की है एक मामले की सुनवाई में सर्वोच्च न्यायलय ने कहा, यदि वायु सेना में एक महिला राफेल लड़ाकू विमान उड़ा सकती है, तों सेना की विधिक शाखा, जज एडवोकेट जनरल (जे एजी )के लिंग तटस्थ पदों पर महिला अधिकारीयों की संख्या कम क्यों है? जस्टिस दीपांकर दत्ता व जस्टिस मनमोहन की पीठ ने आठ मई कों दो अधिकारीयों अर्शनूर कौर व आस्था त्यागी की याचिकाओं पर फैसला सुरक्षित रख लिया है दोनों अधिकारीयों कों महिलाओं के लिए कम सीटे होने के कारण, पुरष समकक्षों से बेहतर रेटिंग (रेकिंग ) के बावजूद जे एजी में नहीं चुना गया दोनों कों क्रमशः चौथी और पाँचवी रेंकिंग मिली थी कौर व त्यागी ने रिक्तियों में भेदभाव कों चुनौती दी है उनका चयन इसलिए नहीं हो पाया, क्यों कि छह पदों में से तीन पर ही महिलाओं कों चुना जा सकता था पीठ ने सेना कि और से पेश एडिशनल सॉलीसिटर जनरल (ए एस जी ) ऐशवर्या भाटी से पूछा, यदि वायुसेना में महिला राफेल उड़ा सकती है तों सेना के लिए जे एजी में ज्यादा महिलाओं कों ऱखना मुश्किल क्यों है?
