गुरुद्वारा बंगला साहिब आए श्रद्धालुओं का दलगत राजनीति के तहत वर्गीकरण गलत : जीके
नई दिल्ली (11 अक्टूबर 2026) गुरुद्वारा बंगला साहिब के अंदर दिल्ली पुलिस के दाखिले के बाद दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की प्रदर्शनकारियों के खिलाफ आई प्रतिक्रिया पर सियासत गर्मा गई है। दिल्ली कमेटी के पूर्व अध्यक्ष मनजीत सिंह जीके ने मौजूदा अध्यक्ष हरमीत सिंह कालका पर निशाना साधते हुए कहा कि यह पहली बार है कि गुरुद्वारा साहिब आए श्रद्धालुओं का दलगत राजनीति के तहत वर्गीकरण किया जा रहा है। जो कि गलत परंपरा की शुरुआत है। क्योंकि सिख सिद्धांत गुरुद्वारा साहिब में आईं संगत को “गुरू की संगत” का दर्जा देते है। पर कालका प्रदर्शनकारी श्रद्धालुओं के जत्थे को आम आदमी पार्टी, वामपंथी जैसे शब्दों से वर्गीकरण करके गलती कर रहे हैं।
जीके ने कहा कि श्री दरबार साहिब परिसर, अमृतसर साहिब की परिक्रमा में 1955 में पंजाब पुलिस के दाखिले के बाद पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री भीमसेन सच्चर को इस्तीफा देना पड़ा था। उस समय गिरफ्तार होने वालों में बड़े अकाली नेता मास्टर तारा सिंह, संत फतेह सिंह तथा मेरे पिता जत्थेदार संतोख सिंह भी शामिल थे। इस खामियाजे के तौर पर भीमसेन सच्चर की कुर्सी गई थी तथा प्रताप सिंह कैरों ने मुख्यमंत्री बनें थे। उसके बाद इंदिरा गांधी ने जब ये गलती दोहराई तो उसका व कांग्रेस का क्या हश्र हुआ, बताने की जरूरत नहीं है।
जीके ने कहा कि अब गुरुद्वारा बंगला साहिब में बावर्दी पुलिस का जाना गलत कैसे नहीं है? इस गुनाह के लिए मनजिंदर सिंह सिरसा से कालका व काहलों सभी दोषी हैं। परन्तु कालका पंथक परंपराओं की रक्षा की बजाए पुलिस के दाखिले को न्यायसंगत बता रहें है। कालका ये बताएं कि जिन कथित प्रदर्शनकारियों को गुरुद्वारा परिसर से हिरासत में लिया गया है, पुलिस ने उनकी हिरासत का क्षेत्र क्या गुरुद्वारा बंगला साहिब आपने रोजनामचे में लिखा है? यदि यह सच है तो फिर गुरुद्वारा परिसर में बी.एन.एस. की धारा 163 की पुष्टि हो जाती है।