देहरादून में दशम गुरु श्री गोबिंद सिंह जी महाराज के आगमन का पूर्ण इतिहास
उत्तराखंड,देहरादून। सिखों के दसवें गुरु, खालसा पंथ के संस्थापक श्री गुरु गोबिंद सिंह जी महाराज का देहरादून आगमन एक बहुत ही महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटना है, जिसकी स्मृति में ही इस बार रेसकोर्स में दों दिवसीय गुरमत समागम और खालसाई महल्ला का आयोजन रविवार कों किया गया
इतिहास इस प्रकार है :
बाबा राम राय जी का काल – सातवें गुरु श्री गुरु हर राय जी के बड़े पुत्र बाबा राम राय जी ने 1676 में देहरादून को बसाया था। औरंगजेब के कहने पर वह यहाँ आकर रहने लगे थे।
गद्दी विवाद और माता पंजाब कौर की विनती -* 1687 में जब बाबा राम राय जी ज्योति-जोत समा गए, तो उनके बाद दरबार की गद्दी को लेकर विवाद और अन्याय की स्थिति बन गई। उनकी धर्मपत्नी माता पंजाब कौर जी ने इस विवाद से निपटने के लिए दसवीं पातशाही श्री गुरु गोबिंद सिंह जी महाराज से सहायता की विनती की थी।
पांवटा साहिब से देहरादून आगमन – उस समय गुरु गोबिंद सिंह जी महाराज पांवटा साहिब में निवास कर रहे थे। माता जी की प्रार्थना पर गुरु साहिब पांवटा साहिब से चलकर देहरादून आए और यहाँ धर्म, न्याय और मर्यादा की रक्षा की।
.धरती का धन्य होना -* गुरु साहिब के पावन चरणों की छोह से यह दून की धरती धन्य हुई थी, उसी पावन स्मृति को समर्पित यह समागम आयोजित किया जा रहा है।
आयोजकों के अनुसार इस समागम का मुख्य उद्देश्य श्री गुरु गोबिंद सिंह जी महाराज के देहरादून आगमन की उस ऐतिहासिक शोभा और तरीके को पुनः जीवंत करना है। निहंग सिंह फौजों का जाहो-जलाल, घोड़े, निशान-नगारे, शस्त्रविद्या (गतका) और पुरानी खालसाई मर्यादा को संगत के सामने दर्शाना है, ताकि आने वाली पीढ़ी अपनी विरासत से जुड़ सके।