नैनीताल,18(फरवरी )2025, (मंगल वार ) ! हाई कोर्ट ने उत्तराखंड के यू सी सी में लिव इन पंजीकरण को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई कि सुनवाई के दौरान टिपणी करते हुए कहाँ कि बिना विवाह किये निर्लजता के साथ रह रहें है तो फिर निजता का हनन कैसे कहाँ कि राज्य सरकार ने भी यह नहीं कहाँ कि आप साथ नहीं रहते है याचिका दायर करने वाले देहरादून के जय त्रिपाठी के अधिवक्ता ने तर्क दिया था कि ऐसे संबंधो के पंजीकरण के लिए अनिवार्य प्रवधान कर राज्य सरकार गप शप को संस्थागत रूप दें रही है याचिका कर्ता ने सर्वोच्च न्यायालय के वर्ष 2017 के फैसले का हवाला दें तर्क दिया कि लिव इन अनिवार्य पंजीकरण से निजता का हनन हो रहा है मुख्य न्याय धीस जी नरेंद्र व न्याय मूर्ति अलोक मेहरा कि खंड पीठ ने सोमवार को सुनवाई के दौरान कहाँ की यू सी सी ऐसे रिश्तों के लिए पंजीकरण करने को कह रही है क्या रेहस्य है? आप दोनों एक साथ रह रहें है, आपका पड़ो सी जानता है और दुनिया जानती है फिर आप जिस गोपनीयता की बात कर रहें है, वह कहाँ है? बिना विवाह के दो लोग निर्लजता के साथ रह रहें है तो फिर निजता का हनन कैसे, कहाँ हुआ याचिका कर्ता ने कहाँ कि अल्मोड़ा के युवक कि हत्या अंतर धार्मिक लिव इन रिलेसनशिप कि वज़ह से कर दी गईं खंड पीठ ने इस याचिका को अन्य याचिका के साथ सम्बंर्द्ध करते हुए अगली सुनवाई के लिए पहली अप्रैल कि तिथि सुनिश्चित ( नियत ) कर दी
