हरेला दिवस को समर्पित कविता, हरेला की धूम है,

*हरेला को समर्पित*

*कलम*: कुलदीप सिंह

*प्रकाशन*: अटल लक्ष्य न्यूज पोर्टल

 

 

 

बीज बोकर आंगन में,

उगाते हैं उम्मीदों की फसल

हरे-भरे पत्तों सी नन्हीं कोंपलें,

बताती हैं जीवन का हर पल

 

धरती मां के माथे पर,

हरी चूड़ियां पहनाने का दिन

गांव-गांव, गली-गली में,

वृक्ष लगाओ का गूंजे गान है

 

बरसात की बूंदों संग,

उगता है एक नया जहां

पीपल, बरगद, देवदार की,

हर डाली पर बसे भगवान है

 

हरेला सिर्फ त्योहार नहीं,

ये संकल्प है आने वाली नस्ल का

पेड़ बचेंगे तो जीवन बचेगा,

यही संदेश है इस पर्व का

 

आओ मिलकर कसम खाएं,

धरती को हरा-भरा रखेंगे

हरेला का ये पावन पर्व,

पीढ़ी दर पीढ़ी मनाएंगे

 

 

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