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*मुख्य बातें:*
*1. पुरानी चुनौतियां, नया समाधान*
1960 के दशक की हरित क्रांति ने भारत को खाद्यान्न की कमी वाले देश से दुनिया के सबसे बड़े कृषि उत्पादकों में बदला था। लेकिन अब समस्या अलग है। मौसम अनिश्चित हो गया है, भूजल घट रहा है, जमीन के टुकड़े छोटे हो रहे हैं और खेतों में मजदूरों की कमी है। ऐसे में अब सिर्फ ज्यादा खाद और बड़े ट्रैक्टर से काम नहीं चलेगा।
*2. कृषि 5.0 क्या है?*
यह खेती का एक नया मॉडल है जिसमें तकनीक सबसे आगे होगी। इसमें शामिल हैं:
*AI, IoT, ड्रोन, रोबोट, सैटेलाइट इमेजरी, एज कंप्यूटिंग और डेटा एनालिटिक्स*
इसका मकसद है – अंदाजे से नहीं, बल्कि सटीक डेटा के आधार पर तुरंत फैसले लेना। यानी खेती “संसाधन-गहन” से “ज्ञान-गहन” बनेगी।
*3. खेत में कैसे काम करेगा?*
– *सेंसर* मिट्टी की नमी, तापमान, पोषक तत्व लगातार चेक करेंगे
– *AI* बताएगा कब पानी देना है, कितनी खाद डालनी है, कीट कहां लग सकते हैं
– *ड्रोन* कुछ मिनट में पूरे खेत का सर्वे करके फसल का तनाव पकड़ लेंगे जो आंखों से नहीं दिखता
– जरूरत वाली जगह पर ही दवा छिड़की जाएगी। इससे लागत घटेगी, पैदावार बढ़ेगी और पानी-बचत होगी
*4. छोटे किसानों के लिए क्यों जरूरी?*
भारत में करीब 86% किसान छोटे और सीमांत हैं। लेख में कहा गया है कि महंगी तकनीक सिर्फ बड़ी कंपनियों के लिए नहीं है। सस्ते IoT डिवाइस, मोबाइल पर AI सलाह और सामुदायिक ड्रोन सेवा से छोटे किसान भी इसका फायदा ले सकते हैं।
*5. सरकार और कंपनियां क्या कर रही हैं?*
सरकार पहले से ही प्रिसिजन फार्मिंग, डिजिटल मृदा स्वास्थ्य कार्ड, कृषि ड्रोन और “डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन” पर काम कर रही है। कई भारतीय एग्री-टेक कंपनियां AI से फसल जांच, स्मार्ट सिंचाई और फार्म मैनेजमेंट प्लेटफॉर्म बना रही हैं।
*निष्कर्ष:*
कृषि 5.0 का लक्ष्य है जलवायु परिवर्तन और संसाधनों की कमी के बीच ज्यादा उत्पादन करना। यह सिर्फ एक भविष्य की सोच नहीं, बल्कि भारत की कृषि व्यवस्था में धीरे-धीरे शामिल हो रही वास्तविकता है।