*संपादकीय: काकार पर केस, त्रिशूल पर जयकारा – क्या सिखों की धार्मिक स्वतंत्रता दूसरे दर्जे की है?*
*लेखक: कुलदीप सिंह,
*अटल लक्ष्य न्यूज पोर्टल | 2जून 2026*
महाराष्ट्र के नांदेड़ साहिब – जहां दशमेश पिता गुरु गोबिंद सिंह जी ने 1708 में अपनी देह त्यागी – उसी पवित्र भूमि पर आज पंजाब से आए 5 अमृतधारी सिख नौजवानों पर ‘आर्म्स एक्ट’ में मुकदमा दर्ज कर दिया गया। जुर्म क्या था? उन्होंने गुरु का हुक्म माना। पांच काकार धारण किए थे। उनमें एक कृपाण भी थी।
*यह घटना नहीं, भारत के संविधान पर सीधा हमला है।* यह सिखों के ‘जीवन के अधिकार’ और ‘धार्मिक स्वतंत्रता’ पर पुलिसिया तलवार है। और सबसे शर्मनाक बात – यह दोहरे मापदंड की मिसाल है।
*1. काकार क्या है – हथियार नहीं, सिख
की आत्मा है*
गुरु गोबिंद सिंह जी ने 1699 की वैसाखी पर खालसा सजाया और 5 काकार अनिवार्य किए:
1. *केश* – प्रकृति के स्वरूप को स्वीकारना
2. *कंघा* – स्वच्छता और व्यवस्था का प्रतीक
3. *कड़ा* – नैतिकता का अटूट बंधन
4. *कच्छा* – आत्म-संयम और चरित्र की निशानी
5. *कृपाण* – जुल्म के खिलाफ धर्म की रक्षा का संकल्प
कृपाण ‘हमला’ करने के लिए नहीं, ‘रक्षा’ करने के लिए है। जैसे डॉक्टर का स्टेथोस्कोप, वकील का काला कोट, सैनिक की वर्दी – वैसे ही सिख का काकार। क्या कल को पुलिस डॉक्टर से स्टेथोस्कोप छीन लेगी?
*2. कानून क्या कहता है – संविधान सिख के साथ खड़ा है*
1. *अनुच्छेद 25*: प्रत्येक नागरिक को ‘धर्म को मानने, आचरण करने और प्रचार करने’ का मूल अधिकार है। काकार धारण करना ‘आचरण’ है, ‘अपराध’ नहीं।
2. *अनुच्छेद 21*: जीवन का अधिकार – और सिख के लिए काकार के बिना जीवन अधूरा है। काकार उतारना = पहचान छीनना = मानसिक मृत्यु।
3. *आर्म्स एक्ट 1959, धारा 4*: साफ लिखा है – “कृपाण रखने और ले जाने पर सिखों को इस एक्ट से छूट होगी।”
4. *सुप्रीम कोर्ट*: 1957 के _Commissioner, Hindu Religious Endowments vs Sri Lakshmindra Thirtha Swamiar_ से लेकर 2016 के _Bijoe Emmanuel_ तक – 5 बार कोर्ट कह चुका कि धार्मिक आचरण पर रोक नहीं लगाई जा सकती।
*फिर नांदेड़ पुलिस किस कानून की किताब पढ़ रही है?* क्या थानेदार का लट्ठ संविधान से बड़ा हो गया?
*3. दोहरा मापदंड – जो सबसे ज्यादा चुभता है*
*एक भारत, दो कानून?*
*दृश्य 1: हिंदू संगठनों के कार्यक्रम*
बजरंग दल, विश्व हिंदू परिषद, दुर्गा वाहिनी पूरे देश में ‘त्रिशूल दीक्षा’ कार्यक्रम चलाते हैं। हजारों की संख्या में त्रिशूल बांटे जाते हैं। मंच पर सांसद, विधायक, मंत्री फोटो खिंचवाते हैं। नारे लगते हैं – “धर्म की रक्षा के लिए शस्त्र उठाना जरूरी है।” पुलिस सुरक्षा देती है। मीडिया ‘सांस्कृतिक गौरव’ बताता है।
*दृश्य 2: सिख नौजवान*
नांदेड़ साहिब मत्था टेकने गया। कृपाण कमर में थी। FIR हो गई। थाना, कचहरी, जमानत। मीडिया खामोश। असल में अभी नांदेड़ साहिब महाराष्ट्र में दुकानदारों के यहां छापे मारकर उन्हें आर्म्स एक्ट में मुकदमा दर्ज कर दिए जो कि न्याय संगत नहीं हैं
*सीधा सवाल:*
देवी दुर्गा के हाथ में त्रिशूल ‘आस्था’ है, भगवान शिव के हाथ में त्रिशूल ‘गौरव’ है, भगवान राम के हाथ में धनुष ‘मर्यादा’ है – तो गुरु गोबिंद सिंह के सिख के हाथ में कृपाण ‘आर्म्स एक्ट’ कैसे हो गई?
क्या सिखों का भगवान अलग है? क्या सिखों का संविधान अलग है?
*4. यह हमला सिर्फ काकार पर नहीं, भारत की आत्मा पर है*
1. *पहला हमला*: फिल्म ‘चढ़दी कला’ पर 129 कट। क्योंकि वो सिख इतिहास दिखाती है।
2. *दूसरा हमला*: CBFC का सेंसरशिप = संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) का गला घोंटना।
3. *तीसरा हमला*: अब सीधे नांदेड़ में काकार पर FIR = अनुच्छेद 25 और 21 का कत्ल।
*पैटर्न साफ है* – सिख पहचान, सिख इतिहास, सिख धर्म – तीनों को निशाना बनाया जा रहा है।
*5. बीजेपी सरकार से 3 सवाल – क्योंकि बात ‘सबका साथ, सबका विकास’ की है*
1. क्या ‘एक देश, एक विधान’ का मतलब ‘एक धर्म, एक विधान’ है?
2. जब महाराष्ट्र में आपकी सरकार है, तो नांदेड़ पुलिस को किसने हक दिया कि वो गुरु के सिख को अपराधी बना दे?
3. त्रिशूल बांटने वाले संगठनों को आपका संरक्षण और कृपाण रखने वाले सिखों पर मुकदमा – क्या यही ‘नया भारत’ है?
*महामहिम राष्ट्रपति जी देहरादून आ रही हैं।* क्या वे चाहेंगी कि उनके राज में बाबा साहेब के संविधान की धज्जियां उड़ें? क्या वे चाहेंगी कि जिस फौज में सिख रेजिमेंट देश के लिए जान देती है, उसी सिख के बेटे पर उसके धर्म के कारण केस चले?
*अटल लक्ष्य की मांग:*
1. नांदेड़ साहिब की FIR तुरंत रद्द की जाए। दोषी पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई हो।
2. गृह मंत्रालय सभी राज्यों को एडवाइजरी जारी करे – “काकार पर कोई रोक नहीं, यह संवैधानिक अधिकार है।”
3. CBFC को भंग कर ‘धर्मनिरपेक्ष सेंसर बोर्ड’ बने जो हर धर्म का सम्मान करे।
4. प्रधानमंत्री जी ‘मन की बात’ में स्पष्ट करें – “कृपाण सिख की शान है, अपराध नहीं।”
*आखिरी बात:*
कृपाण निकालने का हुक्म देने वाले शायद भूल गए कि 1947 में जब कराची से ट्रेनें लाशों से भरकर आ रही थीं, तो इन्हीं कृपाणों ने हिंदू-सिख बहन-बेटियों की लाज बचाई थी। 1965, 1971, कारगिल – हर जंग में ‘जो बोले सो निहाल’ कहकर यही कृपाण दुश्मन की छाती पर वार करती थी। और जब मुगल या अन्य आक्रमणकारी आ कर बहन बेटीयो की इज्जत पर हाथ डालते थे तब ये ही वीर खालसे आक्रमणकारियों पर टूट कर न केवल बहन बेटीयो की अस्मत बचाते थे, अपितु लूटे हुए धन को भी वापिस लाकर देते थे। एक तरफ भारत का कानून समानता की बात कर रहा है, और कहीं प्रदेशों में बीजेपी सरकार यूसीसी अर्थात समान नागरिक संहिता का कानून ले कर आती है। वहीं दूसरी तरफ हिंदू वादी दल खुलेआम त्रिशूल वितरण करे उस पर कोई कार्यवाही नहीं दूसरी तरफ सिखों को कानून में कृपाण रखने का अधिकार दिया हैं, परंतु दुर्भाग्य पूर्ण तरीके से सामान नागरिक संहिता की बात करने वाली सरकार के राज में निरंकुश तरीके से सिखो की धार्मिक स्वतंत्रता व जीवन के अधिकार पर सीधा हमला किया है, जो कि आजकल पूरे सोशल मीडिया में छाया हुआ है। जब कानून सब के लिए बराबर है तो फिर सिखों से ये भेद भाव क्यों और नांदेड़ में की गई कार्यवाही की संपूर्ण सिख संगत निंदा व भर्त्सना करती हैं और तुरंत ऐसा कार्य करने वाले दोषियों पर कानूनी कार्यवाही की मांग करती है। नहीं तो विवश होकर सिख समुदाय को एकत्रित होकर विरोध प्रदर्शन करने के लिए बाध्य होना पड़ेगा। वहीं इस मामले में आर्म्स एक्ट की कार्यवाही वापिस ली जाएं और भेदभाव पूर्ण तरीके से बिना वजह तनाव पैदा करने वाले अधिकारियों को कानून के कटघरे में लाया जाना चाहिए जिन्होंने धार्मिक स्वतंत्रता व जीवन की स्वतंत्रता पर सीधा हमला किया है। भारतीय संविधान में सब को अपने अपने धर्म का पालन करने की स्वतंत्रता दी हैं तो फिर ऐसा प्रतिघात क्यों। भारतीय जनता पार्टी सबका साथ व सबका विकास की बात करती हैं, तो फिर सिखों के साथ ये कैसा बर्ताव, क्या दोषियों पर कार्यवाही सुनिश्चित की जाएगी। जब न्याय सबके लिए, तो हम सिख इससे वंचित क्यों ये जवाब तो सरकार को भी देना होंगा। वहीं शिरोमणि कमेटी इस मामले में क्या एक्शन लेती हैं ये देखना दिलचस्प होगा।
*आज उसी कृपाण को अपराधी बना दोगे तो कल सरहद पर कौन खड़ा होगा?*
सिखों का सब्र परीक्षा मत लो। गुरु ने कहा है – “जब सब्र का बांध टूटता है, तो जुल्म की हुकूमत हिल जाती है।”
*यह लेख नहीं, चेतावनी है।
*काकार रहेगा, सिख रहेगा, संविधान रहेगा।*
*चढ़दी कला 🚩 जय हिन्द, जय संविधान।*