एक तरफ धाकर धामी सरकार आपने तीन वर्ष के शासन की उपलब्धि में लेंड
माफ़ीया पर अंकुश लगाने हेतु सख्त भू कानून कों आपनी उपलब्धि बताती है, वहीं अस्थाई राजधानी देहरादून के प्रेमनगर स्मिथ नगर में भू माफ़ीया बे धड़क हो कर कृषि भूमि में काबिज हो रहा है, किसी ने बनाई चकी तो किसी ने बनाई गौशाला
(एम डी डी ए की जे ई ने नहीं की कोई कार्यवाही, बस कुछ कों दिया नोटिस, और हो गया कृषि भूमि में निर्माण )
देहरादून,23(मार्च ),2025, (रविवार ) एक तरफ धाकर धामी की सरकार तीन वर्ष के शासन काल में लागू भू कानून कों आपनी उपलब्धि बता रही है और कह रही है की भू माफ़ीया पर अंकुश लग गया है, परन्तु सच्चाई इसके विपरीत है देहरादून जो की उत्तराखंड की अस्थाई राजधानी है जब उसके निकट स्थित प्रेमनगर के स्मिथ नगर में लगातार भू माफ़ीया काबिज हो रहा है कहीं आटा चकी तो कई गौशाला तो कई अन्य निर्माण कर आनाधिकृत रूप से भू माफ़ीया लगातार काबिज हो रहा है इसको लेकर जनता दरबार में भी प्रबुद्ध नागरिकों ने आपनी शिकायत दर्ज कराई थी उस पर आज तक कोई कार्यवाही नहीं की गईं कुछ जागरूक प्रबुद्ध नागरिकों द्वारा समाचार पत्रों व कुछ पोर्टल में न्यूज़ प्रकाशित होने के बाद एम डी डी ए की जे ई द्वारा नोटिस दे कर इत श्री कर लीं गईं ना तो उन्होंने इन अवैध निर्माण में कोई कार्यवाही की, ना तो इन्हे शील किया गया, ना ही बुलडोजर चला, इसको लेकर पूरे प्रेमनगर स्मिथ नगर में चर्चा है परन्तु ऐसा लगता है की विभागीय मिलीभगत में केवल खानापूर्ति की जा रही है और प्रदेश की क़ीमती कृषि भूमि कों उसके अधिकारी ही आपने निजि स्वार्थ या लालच में दाव लगा रहें है जब राज्य सरकार की नाक के नीचे अस्थाई राजधानी में ये सब हो रहा है, तो पर्वतीय इलाकों में क्या स्थिति होंगीं ना केवल विभागीय अधिकारी जे ई की भूमिका के कारण ना केवल एम डी डी ए अपितु राज्य सरकार की छवि भी प्रभावित हो रही है इसको लेकर लगातार चर्चा ये व्यपत हो रही है जागरूक नागरिक प्रबुद्ध नागरिकों ने ना केवल भू माफ़ीया अपितु एम डी डी ए जे ई पर भी कार्यवाही की माँग की है