देहरादून,6(मार्च )2025, (वीरवार )!
उत्तराखंड के धाम हों या देश के अन्य किसी भाग के ,दिन व दिन उनका जो पर्यटन के नाम पर व्यवसायीकरण किया जा रहा है उससे एक आम श्रद्धालु को कुछ लेना देना नही। उत्तराखंड मे जो ₹6000 करोड़ की लागत से रोपवे की घोषणा की गई जिसका श्रेय लेने की होड़ भी गई,जरा उन घोड़े,खच्चर, सड़क मार्ग के दोनों ओर कार्य करने वाले हजारों छोटे दुकानदार एवं अन्य लोग जो 6 माह यात्रा की प्रतीक्षा करते हैं वह सब अपनी रोजी रोटी खो देंगे,उनका तो सोचो, आर्थिक लाभ मिलेगा मुट्ठीभर बाहरी लोगों को। 6 वर्ष मे इसकी लागत भी ₹10000 करोड़ होगी,यदि यही राशि उस ही क्षेत्र के विकास पर लगे तो से रोपवे से बिना पर्यावरण को हानि पहुंचाएं कहीं ज्यादा लाभ मिलेगा ।इस तरह की है योजना वही हो जहां सड़क मार्ग संभव ही नही।
यश वीर आर्य
संयोजक
जागरूक बनो आवाज उठाओ
- उत्तराखंड के धाम हों या देश के अन्य किसी भाग के, दिन व दिन उनके जो पर्यटन के नाम पर व्यवसाय किया जाता है, उनमें से एक आम अवशेष को कुछ लेना देना नहीं है। मे जो ₹6000 करोड़ की लागत से रोपवे की घोषणा की गई थी जिसकी श्रेय लेने की होड़ भी गई थी, जरा उन घोड़े, खच्चर, रोड मार्ग के दोनों ओर काम करने वाले हजारों छोटे कलाकार और अन्य उत्तराखंड लोग जो 6 महीने की यात्रा की यात्रा करते हैं वे सब अपनी रोजी रोटी खो गए, उनका तो सोचो, आर्थिक लाभ विशाल छात्र भर बाहरी लोगों को। 6 साल में इसकी लागत भी ₹10000 करोड़ होगी, अगर यही राशि उसी क्षेत्र के विकास पर लगे तो रोपवे से बिना पर्यावरण को पहुंचाए, जहां ज्यादा फायदा मिलेगा। इस तरह की योजना वहीं हो जहां सड़क मार्ग संभव ही नहीं।
यशवीर आर्य
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वैज्ञानिक बनो आवाज उठाओ
