ज्योतिषशास्त्र में शनिदेव को विशेष स्थान प्राप्त है। शनि को पापी और क्रूर ग्रह कहा जाता है। शनि के राशि परिवर्तन को ज्योतिष में बहुत अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है। शनिदेव 2025 में राशि परिवर्तन करेंगे। शनिदेव के राशि परिवर्तन करने से मेष राशि पर शनि की साढ़ेसाती शुरू हो जाएगी। शनि ढाई साल में एक बार राशि परिवर्तन करते हैं। मेष राशि पर 2032 तक शनि की साढ़ेसाती रहेगी। 2032 में शनि के राशि परिवर्तन करते ही मेष राशि वालों को साढ़ेसाती से मुक्ति मिल जाएगी। शनि के राशि परिवर्तन से किसी राशि पर शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या शुरू हो जाती है तो किसी राशि से शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या का प्रभाव खत्म हो जाता है। शनि की साढ़ेसाती की वजह से व्यक्ति का जीवन प्रभावित हो जाता है। व्यक्ति को कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या से मुक्ति के लिए दशरथ कृत शनि स्तोत्र का पाठ जरूर करें। दशरथ कृत शनि स्तोत्र की रचना भगवान श्री राम के पिताजी राजा दशरथ ने की थी। दशरथ कृत शनि स्तोत्र का पाठ करने से शनिदेव की कृपा प्राप्त होती है।